2019 का ऐसा चुनाव जब पीएम के अलावा कोई और पीएम पद का उम्मीदवार नही

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लोकसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद लोगों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है क्योंकी ये चुनाव बेहद दिलचस्प हैं और दिलचस्प होंगे भी क्यों नही इस बार का चुनाव 30 साल में पहला ऐसा चुनाव है जब पीएम के अलावा कोई और पीएम पद का उम्मीदवार नही हैं

जितने भी चुनाव हुए, उन सबकी एक खासियत यह रही कि भाजपा की तरफ से जहाँ अटल बिहारी वाजपेयी पीएम पद के दावेदार होते थे, वहीं विपक्ष की ओर से यह सपना देखने का हक़ सबको मिल गया था क्योंकि यह वही दौर था, जब तीसरे मोर्चे की राजनीति जोरों पर थी अमर सिंह,लालू यादव, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, जैसे नेताओं में से पीएम निकाल लेते थे तीसरे मोर्चे के नेताओं ने इंद्र कुमार गुजराल को पीएम बनाने का निर्णय लिया

जब अटल जी 13 महीने और फिर 5 साल के लिए पीएम बने तो भाजपा की ओर से इस पद के लिए कोई कन्फ्यूजन नहीं रहता था, लेकिन विपक्षी दलों में दस सासंदों वाली पार्टी का मुखिया भी इस पद को अपने सपने में देखने के लिए अधिकृत था

2014 में पीएम पद के सपने देखने वाले नेताओं की लिस्ट काफी लंबी थी  शरद पवार, मायावती, जय ललिता,लालू ,मुलायम चन्द्र बाबू नायडू इस पद के लिए  दावेदार थे, वैसे दावेदार तो राहुल गाँधी भी थे लेकिन नरेन्द्र मोदी की जीत से उन सभी के सपनें टूट गए

मायावती को पीएम पद का सशक्त दावेदार बताया जाता है, वेसे इस बार फिर सशक्त दावेदार हो सकती थीं अगर मायावती उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर लड़तीं, या पीएम पद पर कॉन्ग्रेस से समर्थन का आश्वासन लेने के बाद वे, देश भर में कॉन्ग्रेस से साथ गठबंधन करके लड़तीं, मायावती अपने गढ़ उत्तर प्रदेश में 80 में से मात्र 36 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं

ममता बनर्जी अधिक से अधिक 20 सीटें ला सकेंगी और इतनी सीटों पर उन्हें कौन पीएम बनाएगा और सहयोग कौन देगा? मुलायम सिंह यादव भी यादव भी करोड़ों लोगों के सामने नरेंद्र मोदी  को फिर से पीएम बनने का आशीर्वाद दे चुके हैं लालू यादव के पुत्र तेजस्वी कितनी ही चतुराई दिखा लें, लेकिन वे अपने पिता की राजनीति को आगे नहीं बढ़ा सकते, और उसका दौर भी अब बीत चुका है
अब ऐसे में सिर्फ एक व्यक्ति बचता है जो अभी प्रधानमंत्री है, जिसके पास न अनुभवों की कमी हैं ना समर्थकों की अब ऐसे में किसका दाव चलता है ये तो मतगणना के बाद ही हम जान