हम समझते हैं, हमारी भीड़ समझती है, फिर वो क्यों नहीं?

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एक जाने माने खबरिया पोर्टल पर हमें अलीगढ़ के आक्रोश भरे माहौल से एक अलग सी घटना पढ़ने को मिली. एक ढाई साल की मासूम के क़त्ल की घटना के बाद उसी क्षेत्र से सामने आई इस घटना ने हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया.

ये बात तो आपको मालूम ही होगी कि अलीगढ़ के टप्पल कस्बे का माहौल आजकल बदला हुआ है. इस बदले हुए माहौल की वज़ह है समुदाय विशेष के मोहम्मद जाहिद और असलम द्वारा ढाई साल की मासूम बच्ची का बेरहमी से किया गया क़त्ल.

ये क़त्ल कितनी बेरहमी से किया गया इसका सबूत बच्ची की पोस्ट मोर्तेम रिपोर्ट ने दिया. रिपोर्ट के मुताबिक़ बच्ची के बालों को शायद तेज़ाब से जलाया गया था. उसके हाथ टूटे हुए थे. उसकी आँखें निकाल दी गई थीं और जननांग गायब था. बच्ची का शव जब बरामद हुआ तो उसका शरीर गलने लगा था.

बेहद बेरहमी से किये गए बच्ची के इस क़त्ल के बाद से अलीगढ़  गुस्से और तनाव से भर गया. लोगों में बच्चे के हत्यारों के खिलाफ इतना गुस्सा नज़र आया पुलिस प्रसाशन सतर्क हो गया.

इस मामले में 4 हत्या आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन इससे जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ. इन  सभी अपराधियों पर पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चलना तय है, लेकिन फिर भी अपहरण के बाद क़त्ल कर दी गई मासूम बच्ची के कातिलों को सजा दिलाने के लिए,  गुस्साए हुए लोग सड़कों पर उतर आये.

सोशल मीडिया पर भी जनता में इस मामले को लेकर काफी रोष दिखाई दिया. बच्ची के कातिलों को सज़ा दिलाने के लिए हर सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर अलग-अलग अभियान चलाये जा रहे हैं. अलग-अलग जगहों के लोग अलीगढ़ में इकट्ठा हो रहे हैं और आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

लोगों के अन्दर भरा आक्रोश देखने के बाद दुर्घटना की आशंका से इलाके के बाज़ार तक बंद रहे. नतीजा ये हुआ कि इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा. कई थानों की पुलिस के साथ-साथ इलाके में रैपिड एक्शन फ़ोर्स और पीएसी को भी तैनात किया गया.

पहले से हाई अलर्ट पर पुलिस को कई रास्तों पर फ्लैग मार्च भी करना पड़ा. लेकिन पुलिस की सक्रियता के बावजूद लोगों ने इकट्ठा होकर जेवर में प्रदर्शन शुरू कर दिया. और यमुना एक्सप्रेस वे पर जाम लगाकर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया.

आरोपी के समुदाय विशेष के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला और समुदाय विशेष के दिल में डर. इसी डर भरे माहौल के बीच, यहाँ से करीब 40 कलोमीटर दूर एक अल्पसंख्यक परिवार किसी समारोह में शामिल होने जा रहा था. इस परिवार के साथ मौजूद थीं उनकी फैमिली फ्रेंड पूजा चौहान.

परिवार के सदस्य शफी मोहम्मद अब्बासी का परिवार अपनी कार में सवार हो, समारोह में जा रहा था. परिवार की कुछ महिलाओं ने बुर्का पहना हुआ था. शायद यही वज़ह रही कि टप्पल की घटना से गुस्साए कुछ मोटरसाइकिल सवार युवकों ने रास्ते में उनकी कार पर लोहे की रोड से हमला कर दिया. कोई कुछ समझ पाटा उससे पहले ही गुस्साए हुए लोगों की एक भीड़ उस परिवार की तरफ बढ़ने लगी.

ये भीड़ कुछ और करती उससे पहले ही अल्पसंख्यक परिवार के साथ मौजूद पूजा चौहान भीड़ और परिवार के बीच आ खड़ी हुईं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पूजा ने हमला करने वाले लोगों को समझाते हुए कहा कि,

“बच्ची के साथ जो कुछ भी हुआ उस बात से हम सभी दुखी हैं, लेकिन इसका गुस्सा बेगुनाह लोगों पर उतारना ठीक नहीं है.”

पूजा की बात सुनकर भीड़ ने परिवार को छोड़ दिया और जल्द से जल्द वहाँ से निकल जाने को कहा. पूजा चौहान की वज़ह से एक निर्दोष अल्पसंख्यक परिवार  हिंसा का शिकार होते-होते बच गया, यही वज़ह है कि लोग पूजा की हिम्मत और उसके काम को काफी सराह रहे हैं.

परिवार वहां से सुरक्षित चला गया, भीड़ पूजा की बातों के असर से शान्ति से चली गयी,  लेकिन कुछ सवाल हैं जो हमारे दिमाग में एक बार आये तो गए ही नहीं.

एक पूजा चौहान की बातों से भीड़ पर असर हो गया कि किसी बेगुनाह को किसी दूसरे के गुनाह की सज़ा नहीं देनी चाहिए, लेकिन फिर क्यों मोहम्मद जाहिद और असलम को उस बच्ची के साथ हैवानियत करते हुए ये बात समझ नहीं आई?

ऐसा तो नहीं है कि जब बच्ची को इतनी निर्ममता के साथ धीरे-धीरे मारा गया होगा तो वो रोई नहीं होगी, चीखी नहीं होगी, चिल्लाई नहीं होगी, क्या उनको यही बात समझ नहीं आई होगी कि किसी बेगुनाह को सजा देना ठीक है या नहीं?

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