आम लोगों के जीवन से 100 गुना कठिन होता है नागा साधुओं का जीवन!

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प्रयागराज में कुम्भ का स्नान चल रहा है. इस कुम्भ में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं नागा साधू! नागा साधू बिना कपड़ों के, शरीर पर राख पोते हुए दिखाई देते हैं लेकिन इनका सबसे बड़ा रहस्य यह होता है कि स्नान के बाद अचानक नागा साधू गायब कहाँ हो जाते हैं?
नागा साधू आम जन मानस को दर्शन नही देते. माना जाता है इनका पूरा संसार अखाड़े तक ही सीमित रहता है हालाँकि जब कुम्भ और अर्ध कुम्भ का आयोजन होता है तब ये पूरे अखाड़े के साथ दिखाई देते हैं. आम लोगों के लिए नागा साधू बेहद अचरज के विषय होते हैं क्योंकि इनका पहनावा, क्रिया कल्प और और पूजाविधि बहुत अलग होती है. नागा साधुओं को समझना बेहद मुश्किल होता है कि कब वे गुस्सा हो जाए और कब खुश, इसलिए प्रशासन की तरफ से इन पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

देखिये नागा साधुओं का त्याग
नागा साधू का मतलब ही पहाड़ होता है. कुम्भ स्नान के बाद कुछ नागा साधू पहाड़ों पर चले जाते है बाकी अपने अखाड़े में चले जाते हैं. नगा साधू अक्सर रात में यात्रा करते हैं और ऐसे सूनसान रास्ते से चलते हैं जहां लोगों से मुलाकात ना हो. अब नागा साधुओं में महिलाए भी शामिल हो गयी है लेकिन महिला नागा साधुओं को कपडें पहनने पड़ते हैं.कहा जाता है आम जीवन जीने से 100 गुणा कठिन जीवन नागा साधुओं का होता है. लगभग एक साल तक कड़ी मेहनत और कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है. शिक्षा ग्रहण करने से पहले उन्हें अपनी इच्छाओ और वासनाओं का त्याग करना पड़ता है. नागा साधू 24 घंटे में मात्र एक बार ही भोजन करते हैं.


यहाँ आपको यह भी जानना चाहिए कि आखिर नागा साधू आये कहाँ से?


शंकराचार्य के काल में भारत में मठों और मंदिरों के धन को लूटने के आक्रमणकारी आ रहे थे. इन आक्रमणकारियों से बचने के लिए सनातन धर्म के विभिन्न संप्रदायों की सशस्त्र शाखाओं के रूप में अखाड़े की स्थापना हुई थी. धर्म और समाज की रक्षा के लिये अखाड़े में मौजूद लोगों को अस्त्र शस्त्र की विद्या दी जाती थी. ये अखाड़े मंदिर और मठो में मौजूद रहते थे. धर्म के इस कार्य में 40 हजार नागा साधुओं ने हिस्सा लिया था. कई बार युद्धों में नागा साधुओं को राजा महाराजाओं के भी समर्थन प्राप्त होते थे. अहमद शाह ने मथुरा पर कब्ज़ा करने के मकसद हमला किया था तब नागा साधुओं ने अपनी ताकत दिखाते हुए इन्हें धूल चटाई थी तब से अभी तक इन नागा साधुओं के अखाड़े चलते आ रहे हैं.

हालाँकि इस बार प्रयागराज में अर्धकुंभ होना था लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे कुंभ का नाम दिया है और इस बार कुंभ का आयोजन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. प्रयागराज में नागा साधुओं के लिए स्नान की उचित व्यस्व्था की गयी है. इसी के साथ स्नान के लिए उमड़ने वाली भीड़ के लिए प्रशासन, रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उचित व्यवस्था करने का दावा किया गया है. लोगों के लिए ट्रेन और बसों की संख्या बढाई गयी है.

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