अक्षय कुमार की फिल्मों से फेमिनिस्ट गैंग के पेट मे हो रहा है मरोड़

“औरतों को पीरियड्स आते हैं लेकिन फिल्म मिलती है, अक्षय को

भारतीय महिला मैडल जीतती है लेकिन फिल्म  मिलती है अक्षय को,

भारतीय महिलाएँ मार्स मिशन लॉन्च करती हैं लेकिन फिल्म मिलती है अक्षय को,

हम औरतों को ऐसा क्या करना पड़ेगा जिससे औरतों पर आधारित फिल्म बने और उसमें लीड रोल औरत ही करे।”

एक mordern फेमिनिस्ट मोहतरमा ने ये ट्वीट किया है, ये ट्वीट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है,

हाल ही में PV सिन्धु ने वर्ल्ड championship जीता है, तो उनपर फिल्म बनाने की घोषणा हुई. इस फिल्म में अक्षय कुमार को भी लिए जाने की बात चल रही है अब आप सोच रहे होंगे की अखय kumar क्या PV सिन्धु का रोल करेंगे, नहीं नहीं वो PV सिंधु का रोल नहीं कर रहे वो पव सिंधु के coach Pulella Gopichand का रोल करने वाले हैं ।

लेकिन हमारे देश की pseudo feminist गैंग को इतनी दिक्कत है कि वो अब ये तक नहीं चाहतीं की किसी आदमी का रोल किसी आदमी को मिल जाए, सिर्फ औरतें ही लीड रोल में रहें.

अब इनकी माने तो आज तक औरतों को कभी लीड रोल मिले ही नहीं और औरतों के हिस्से के सारे लीड रोल अक्षय कुमार खा गये… अल्ट्रा फेमिनिस्ट गैंग को खुद तो कुछ करना नहीं .. लेकिन कोई और करे तो इन्हें दिक्कत है ,,,

अक्षय कुमार शायद दुनिया पहले ऐसे commercial एक्टर होंगे जिन्होंने एक ऐसे सब्जेक्ट पे फिल्म  बनाई जो महिलाओं के लिए सबसे जरूरी मुद्दा था ,, सामाजिक था  , जो समाज की जरूरत थी , जिस मुद्दे पर आगे आ कर महिलाओं को बात करनी चाहिए थी, जागरूकता फैलानी चाहिए थी, उस वक्त ये लोग वीरे दी वेडिंग के MASTERBATION के SCENE को पथ ब्रेकिंग बता रहे थे, लेकिन उस वक्त अक्षय ने ही हिम्मत दिखाई थी की वो किसी ऐसे मुद्दे पर फ़िल्म करे, जिससे समाज में एक अच्छा संदेश जाए या फिर समाज में बदलाव लाये.. इससे FENIMISTON को दिक्कत हो गई,  पैडमैन उस आदमी की कहानी है जो औरतों को कम दाम में sanitary pads मोहैया कराने के लिए पूरे समाज से लड़ जाता है, वो भी तब जब औरतें ही खुद इस मुद्दे पर बात करने पर हिचकिचाती थी। क्या उस कहानी को दुनिया को बताना गलत है क्योंकि periods तो सिर्फ औरतों को आते हैं।

और रही बात मार्स मिशन की तो किसी भी फिल्म  को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए स्टार फेस का इस्तेमाल किया जाता है,  ताकि ये कहानी masses तक पहुंच सके, अक्षय कुमार इस देश के जाने माने कलाकार हैं, पिछले कई सालों से nationalism से भरी फिल्में ज्यादा कर रहे हैं, शायद यही बात लोगों को खटक रही है, और रही बात रोल की तो अगर ये feminism लोग पांच औरतों के बीच एक मेल करैक्टर भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं तो काहे की जेंडर इक्वलिटी और काहे का equal representation।

इनके कहने पे चलने लगे तो आदमी का रोल भी आदमी को नहीं मिलेगा।

जब चक दे इंडिया में शाहरुख महिला हॉकी टीम के कोच का रोल निभाएं तो चलता है, सलमान की फ़िल्म सुलतान में अनुष्का के कैरियर का कोई significance ही नहीं रहता तब भी चलता है, आमीर खान की फ़िल्म thugs of hindustan में कटरीना को सिर्फ Eye candy के तौर पर इस्तेमाल करें तब भी चलता है लेकिन अगर अक्षय कुमार अपनी फिल्म में किसी ऐसे कैरेक्टर का रोल करे जो उन पर फिट बैठे तो लोगों के पेट में दर्द होने लगता है. क्या PV सिन्धु के कैरियर में उनके कोच का कोई योगदान नहीं है?

बड़े खान एक्टर्स हैं उनकी फिल्मों में female एक्टर्स के रोल कितना  होते हैं ये सबको मालूम है, उस रोल का महत्त्व कितना होता है ये भी किसी से छुपा हुआ नहीं है, अपनी मूवी चलवाने के लिए कितने आइटम डांस करवाए जाते हैं, ये भी सबको मालूम है, लेकिन यहां ये pseudo फेमिनिस्ट कुछ नहीं बोलती, बड़े मज़े के साथ इन फिल्मों को देखती हैं, औरतों को हिम्मत देने और आगे बढ़ने के लिए inspire करने वाली फिल्में इन्हें नहीं पसंद आएंगी ( TEPK and पैडमैन) लेकिन शराब, सेक्स  जैसे subjects पर बनी फिल्में इनके लिए feminism का प्रतीक हैं, 

अब आप सोचिये PV सिन्धु के बारे में सब जानते है, लेकिन उनके इस मुकाम तक पहुँचने के पीछे जिन लोगों का हाथ था क्या उनको भी इस फिल्म में जगह नहीं मिलनी चाहिए.

दरअसल असल दिक्कत ये नहीं ही कि सिन्धु पर फिल्म बन रही है, दिक्कत ये भी नहीं है कि उनके कोच को इस फिल्म में दिखाया जा रहा है दिक्कत ये है कि आखिर इस तरह की फ़िल्में अक्षय कुमार क्यों करते हैं… क्यूंकि, उन्होंने तो PM modi का इंटरव्यू लिया था, सैनिकों के लिए पैसे क्यों इकट्ठे करते हैं.. ऐसी फ़िल्में बनाते हैं जिससे MODI सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुँचने में मदद मिलती रहे.. अब ऐसे फिल्मों को क्यों बनाया जाता है जिससे सामाजिक मुद्दे को आईना दिखाया जा सके.. कुछ लोगों की दिक्कत बस यही है