फैक्ट चेक: क्या इस तरह के वीडियो फैलाना सही है?

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साल 2019 लोकसभा चुनाव का साल है, और ये बात किसी से छिपी नहीं है कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में, सोशल मीडिया हुकुम का इक्का साबित हुआ.

सभी जानते हैं कि 2014 के चुनाव में NDA सरकार को ज़बरदस्त जीत दिलाने में सोशल मीडिया का बड़ा ख़ास रोल रहा.

और यही वज़ह है कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी सभी राजनैतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया पर अपना- अपना मोर्चा संभाल लिया है. चुनावों की तारीखों की घोषणा होने के बाद से तो मानो सोशल मीडिया पर घमासान ही छिड़ गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो वायरल हो रहा है पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर. वीडियो को शेयर करते हुए यह दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वोटर्स को वोट देने के लिए पैसा दे रहे हैं.

ये वीडियो क़रीब डेढ़ मिनट का बै और इसमें योगी आदित्यनाथ एक कुर्सी पर बैठे हुए हैं. उनके पास ही खड़ा एक आदमी बारी- बारी से लोगों को उनके नाम से बुला रहा है और उनके हाथ में पैसे थमा रहा है.

जिन लोगों के ये पैसे दिए जा रहे हैं उनमें से ज्यादातर लोग पैसे लेने के बाद योगी आदित्यनाथ के सामने हाथ जोड़ रहे हैं और उनके पाँव भी छू रहे हैं.

एक पब्लिक ग्रुप है फ़ेसबुक पर जो ‘I support Ravish kumar NDTV’ नाम से चलाया जाता है. इस ग्रुप में ही इस वीडियो को शेयर किया गया. और वहाँ शेयर होने के बाद करीब 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने इसे दनादन शेयर किया.

इतना ही नहीं बल्कि फेसबुक के अलावा ट्विटर और व्हॉट्सऐप जैसे सोशल मंचों पर भी इस वीडियो को जमकर शेयर किया जा रहा है.

इस वीडियो को बेस मानते हुए लोग भारतीय चुनाव आयोग पर ये सवाल उठा रहे हैं कि,

‘आगामी 2019 चुनाव से पहले खुल्लम खुल्ला वोटर्स को रिश्वत दी जा रही है, आखिर भारत का चुनाव आयोग इसके खिलाफ़ कुछ करता क्यों नहीं? क्या चुनाव आयोग सो रहा है?’

ये वीडियो इसी तरह के सवालों के साथ ना जाने कितनी जगह शेयर हुआ है, और ना जाने कितने लाख बार देखा गया है. लेकिन इस वीडियो की असलियत क्या है ये हम आपको बताएंगे.

तो असलियत है ये कि इस वीडियो का साल 2019 के लोकसभा चुनाव से कोई लेना- देना नहीं है. बल्कि ये वीडियो काफ़ी पुराना है.

इस वीडियो को असल में ‘Amit Shah Fans’ नाम वाले एक फ़ेसबुक पेज से उठाया गया है. इस पेज के क़रीब 6 लाख फ़ॉलोवर्स हैं. और इसी पेज पर यह वीडियो सबसे पहले शेयर किया गया था.

तारीख 13 मार्च साल 2019 की शाम ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ कैप्शन के साथ पेज पर ये वीडियो पोस्ट किया गया, और उसके बाद अबतक करीब 17 लाख लोगों ने इसे देखा और करीब 6 हज़ार लोगों ने इसे शेयर भी किया.

वीडियो को ध्यान से देखा जाए तो साफ़ नज़र आता है कि योगी आदित्यनाथ योगी के पास खड़ा आदमी लोगों को जो नोट दे रहा है वो सारे नोट पुराने हैं, जो कि 2016 में नोटबंदी के दौरान बंद हो चुके हैं.

वीडियो की थोड़ी और पड़ताल की तो हमें पता चला कि इस वीडियो को अप्रैल साल 2012 में यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया था. तब जब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में गोरखपुर से सांसद थे.

यू ट्यूब के इस वीडियो की मानें तो साल 2012 के अप्रैल माह में गोरखपुर के कई किसानों के खेतों में खड़ी फसल आग लगने से राख हो गई. और योगी आदित्यनाथ ने इन सभी पीड़ित किसानों को सरकारी मदद दिलाई. इस दौरान हर पीड़ित किसान परिवार को करीब डेढ से दो हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई.

कुल मिलाकर इस वीडियो का जो सच हमारे सामने आया, वो ये था कि जिस वीडियो को अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है वो अभी का है ही नहीं.

जिस वीडियो को भ्रष्टाचार, धांधली और रिश्वत देने का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है वो सच है ही नहीं.

बल्कि सच तो ये है कि वीडियो किसानों की मदद का है, और मदद के इस वीडियो को जो लोग झूठ बोलकर आगे सरका रहे हैं, उनके इरादे इस वीडियो से ही साफ़ हो रहे हैं.

ये वीडियो कहीं ना कहीं शायद ये कह रहा है कि वीडियो में तो वोट देने के लिए रिश्वत नहीं दी जा रही, लेकिन झूठे कैप्शन के साथ इस वीडियो को सोशल मीडिया टर शेयर करने के लिए शायद एक खेमे को जरूर रिश्वत दी गई होगी.

देखिये हमारा वीडियो: