पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा हटाने पर क्यों तिलमिलाई कांग्रेस ?

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केन्द्रीय सुरक्षा समिति के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय ने कई बड़े नेताओं को मिली एनएसजी की सुरक्षा हटा दी है. जिनमे विपक्ष के अलावा बीजेपी के भी कई नेता शामिल है. अखिलेश यादव की एनएसजी सुरक्षा हटा दी गयी है साथ ही साथ एल.जे.पी सांसद चिराग पासवान की सुरक्षा Z श्रेणी से Y श्रेणी कर दी गई है और आर.जे.डी नेता लालू यादव ,यू.पी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और बीजेपी के नेता राजीव प्रताप रूडी और साक्षी महाराज की भी सुरक्षा शामिल है .

इसमें देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल है उनकी सुरक्षा एसपीजी से हटाकर Z+ कर दी गयी है. जिस पर कांग्रेस विरोध करती हुई नज़र आ रही है और सरकार के फैसले पर आलोचना करते हुए कहा कि ,”पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को याद रखना चाहिए कि वे भी एक दिन ‘पूर्व’ होंगे।” तो क्या कांग्रेस सीधे सीधे धमकी दे रही है?..सुरक्षा का घटना और बढना ख़ुफ़िया एजेंसी की जाँच पड़ताल के बाद होता है और मनमोहन सिंह के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह खुद व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं है, वह सरकार के फैसले के साथ जाने को तैयार हैं..तो कांग्रेस क्या साबित करना चाहती है? की वह सुरक्षा समिति और ख़ुफ़िया एजेंसी से बड़ी है? और यह जाँच जरूरी भी है क्योकि हर साल सरकार लाखो रूपये सिक्यूरिटी मे खर्च करती है.

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट करके इस मामले पर नाराजगी जताई है और कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि “सुरक्षा कवर चुनिंदा तरीके से नहीं हटाना चाहिए”। दरअसल पहले भी इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और वीपी सिंह की सुरक्षा कवर हटाया था. खतरे की आशंका को देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा कवर दिया जाता है. और जब मनमोहन सिंह को दिक्कत नही है तो फिर कांग्रेस क्यों बाल की खाल निकालने मे लगी है

फैक्ट्स के मुताबिक अब यह सुरक्षा पी एम नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी , राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पास है . अब पूरे देश में इन्हीं चार लोगों के पास एसपीजी सुरक्षा है और अगर किसी को भी सुरक्षा की जरूरत होगी तो सुरक्षा समिति और खुफिया एजेंसी देखेगी .