शोभा डे क्यों बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी हितैषी

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शोभा डे, नाम तो सुना ही होगा, कोई छोटी मोटी पत्रकार थोड़ी ना हैं, एक वक्त था जब भारतीय दर्शकों में इनकी काफी इज्ज़त थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में शोभा ने अपने प्रशंसक कम और आलोचक ज्यादा पैदा कर रहीं है. वो अपने bio में लिखती हैं की वो एक पत्रकार हैं, coloumist हैं और ओपिनियन शपेर हैं. ट्विटर पर इनके 20 लाख से भी ज्यादा followers. जो इनके लिखे हुए त्वीट्स को पढ़ते हैं.

फिलहाल वो अपने एक पुराने आर्टिकल के कारण twitter पर फ़जीहत झेल रही हैं, इसके पीछे की वजह हम आपको पहले बताना चाहएं की शोभाइस वक्त विवादों में क्यों घिरी हुई हैं. दरसल कुछ ही दिनों पहले भारत में पाकिस्तान के उचायुक्त रह चुके अब्दुल बशीत, उन्होंने एक पाकिस्तानी ब्लॉगर को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमे उन्होंने कहा था की बुरहान वानी की मौत के बाद उन्हें कोई भी भारतीय पत्रकार नहीं मिल रहा था जो की बुरहान वानी और कश्मीर पर उनके agende के मुताबिक एक बढ़ियां आर्टिकल लिख सके. फिर जा कर उनको मिलीं shobha डे, जिन्होंने इस काम हो करने के लिए हामी भरी. उनका आर्टिकल टाइम्स of india में 17 जुलाई 2016 में प्रकाशित हुआ था. उसकी headline है Burhan wani is dead but he’ll live on till we find out what kashmir really wants जिसका नाम है ” बुरहान अब मर चूका है लेकिन वो जिंदा रहेगा जब तक हमे ये नहीं पता चल जाता की कश्मीर असल में चाहता क्या है, जिसमे shobha ने लिखा था की ‘अब समय आ गया है कि इस मुद्दे को जनमत संग्रह के जरिए हमेशा के लिए सुलझा लिया जाए.’ 

जब ये आर्टिकल सबके सामने आया तो लोगों ने शोभा पर देशद्रोह का आरोप लगते हुए, जम कर लताड़ा. सोभा को शयद अंदाज़ा नहीं था की दबी पुरानी बात यूँ इस तरह से सबके सामने आ जाएगी. आनन फानन में सोभा ने इस आरोप को झुटला दिया और सारा दोष बशीत पर ही मड़ दिया. लेकिन इस बात को वो कैसे झुटला सकती है की वो आर्टिकल उन्होंने ने ही लिखा है. सचाई सामने आने के बाद शोभा अब अपना पल्ला झड़ने का है मुमकिन प्रयास कर रहीं है लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब सोभा ने अपनी भारत विरोधी सोच ज़ाहिर की है. उन्होंने धारा 370 के हटने के बाद भी अमित शाह को मेंशन करते हुए एक ट्वीट किया था जिसमे उन्होंने लिखा था की ” प्रिय अमित शाह , अब जब अपने कश्मीर की दिक्कत सुलझा ही ली है तो ज़रा थोडा टाइम निकाल कर सकी नका की ट्रैफिक की दिक्कत को भी सुलझा दीजिये जो की 1947 से चली आ रही है. सादर, अख्हा mumbai.”

एक तरफ सोभा कश्मीर पर इतना गैरज़िमेदाराना लेख लिख देती हैं और दूसरी तरफ वो कश्मीर के हित में हुए एक ऐतिहासिक कदम का मज़ाक उड़ा देती हैं.

अगर आपको याद हो तो 2014 में जब नरेन्द्र मोदी की केंद्र में सरकार बनी थी, जिसके कुछ ही दिन बाद ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे अपना कार्यभार संभालने से पहले ही एक दुर्घंता का शिकार हो गये थे. तब हमारी वरिष्ट पत्रकार ने उसपर कुछ ऐसी प्रतिक्रिया दी थी, उन्होंने अच्छे दिनों कर हवाला देते हुए कहा था की मोदी सरकार की मंत्री के परिवार के तो बुरे दिन आ गए, किसी की दुखद मौत पर मज़ाक बनाने के लिए twitter ने इस ट्वीट को pan कर दिया था.

एक पत्रकार जो खुद जो देश की बेटी बताती है, अपनी बुलंदियों का श्रेय अपने दर्षकों को भी देती है, लेकिन उनकी भावनाओं की कद्र नहीं करती, 2015 में सोभा डे ने एक ट्वीट किया था की ” मैंने अभी beef खाया है, आओ मुझे मार डालो,” वो दरसल लिंचिंग की ओर इशारा कर रहीं थी, लेकिन उनके मुताबिक इस देश में beef खाने पर लिंचिंग हो जाती है. उनका कत्लेआम कर दिया जाता है. जब एक जनि मानी हस्ती ऐसी बातें करने लग जाए तो उससे देश दुनिया भर में हँसी का पत्र बनता है. क्यूंकि दुनिया उसी चेहरे को पढ़ती हैं जिसे पत्रकार उजागर करते हैं. और shobha दे जैसी महान पत्रकार अपने देश का ये चेहरा दुनिया भर में प्रचारित कर रही हैं.

सोभा दे यहीं नहीं रुकीं , अगर आपको याद हो तो 2016 में रिओ ओलंपिक्स हुए थे. यहाँ हमारे एथलीटों को ये उम्मीद रहती है की हार हो या जीत उनके देश के लोग उन्हें प्रोत्साहित करंगे लेकिन सोभा ने कहा की “ओप्लाम्पिक्स को हम इतनी तवाजु की क्यों देते हैं. उन्होंने ये भी लिखा की Team India का Olympics लक्ष Rio जाओ. Selfies लो. और खाली हाथ वापस आओ. क्या बर्बादी है पैसे की और मौके की,” अगर ये न पता होता की ये ट्वीट शोभा का है तो शायद लोग मानते की ये ट्वीट किसी नासमझ बच्चे ने किया है लेकिन ये हमारे देश की सबसे प्रसिद्ध महिला पत्रकार का ट्वीट था. अब ऐसी मानसिकता वाले इंसान को आप क्या कहेंगे? क्या ये पत्रकार कहलाने लायक हैं.