पुलिस के बाद अब वकीलों का प्रदर्शन, कब ख़त्म होगा ये संग्राम ?

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कानून के रखवाले और दिल्ली के रखवाले आमने सामने आ गये है. मामूसी सी बात को लेकर शुरू हुआ विवाद आज उग्र रूप ले चुका है. दिल्ली पुलिस के जवानों ने कल दिल्ली पुलिस हेडक्वाटर के सामने प्रदर्शन किया था… दरअसल पुलिस वालों का कहना है था कि घटना के जब कोर्ट के माध्यम से पुलिस वालों पर कार्रवाई हुई तो अगले दिन वकील पुलिस वालों को क्यों पीट रहे हैं? झुण्ड बनाकर वकील पुलिस को देखते हुए पीटना शुरू कर देते है. दिल्ली पुलिस के जवाब अपनी सुरक्षा, एक यूनियन और दोषी वकीलों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे और जिन पुलिस वालों को दोषी बताकर सस्पेंड किया गया है उन्हें बहाल कर दिया जाए.. 10 घंटे से अधिक चले इस प्रदर्शन बड़ी संख्या में पुलिस और उनके परिजन मौजूद थे.. हालाँकि रात होते होते पुलिस के जवानों की मांग मान ली गयी और फिर इस तरह से प्रदर्शन खत्म हुआ.. लोगो ने थोड़ी चैन की सांस ली ही थी कि उधर अगले दिन सुबह सुबह वकीलों ने दिल्ली समेत कई कोर्ट में काम काज को पूरी तरह से ठप कर दिया.

दिल्ली के सभी कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन जारी है और काम काज पूरी तरह ठप है. वकीलों की हड़ताल की वजह से आज आम लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है. किसी की बेल थी, किसी की पेशी थी, किसी के केस का फैसला आने वाला था लेकिन वकील के आगे सब बेदम है. वकीलों ने कोर्ट के गेट को ही बंद कर बैठ गये है. वकीलों का कहना है कि जो भी दोषी पुलिस वाले हैं उन पर कार्रवाई हो.. हालाँकि कोर्ट ने ही दोषी पुलिस वालों को सस्पेंड करने का आदेश दे दिया है. वकीलों के प्रदर्शन के दौरान रोहिणी कोर्ट की छत पर एक वकील चढ़ गया था.. वहीँ पर एक और वकील आत्महत्या करने की भी कोशिश कर रहा था.. दरअसल इस केस में पुलिस और वकील दोनों विक्टिम के रूप में है और दोनों उग्र भी!

 खैर अभी तक ये लड़ाई चल रही है.. दरअसल मंगलवार को पुलिस वाले जब पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तभी एक बड़ी दिलचस्प बात देखने को मिली.. दिल्ली पुलिस के सीपी अमूल्य पटनायक प्रदर्शन कर रहे पुलिस वालों को समझा रहे थे कि वे अपने अपने काम पर लौटे.. हम मामले को देख रहे हैं लेकिन इसी बीच नारेबाजी चल रही थी कि हमारा सीपी कैसा हो.. किरन वेदी जैसा हो.
लेकिन अब सवाल तो यही था कि आखिर इस लड़ाई में किरन वेदी कहाँ से आ गयी..

15 जनवरी 1988 को पुलिस ने एक वकील को सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एक लड़की का पर्स चुराते हुए गिरफ्तार किया था. जब 16 जनवरी को इस वकील को हथकड़ी लगाकर तीस हजारी कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वहां के वकील भड़क गए और उन्होंने तत्काल आरोपी वकील को छोड़ने की मांग की और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मजिस्ट्रेट ने वकील को उसी दिन छोड़ दिया और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा… इसके बाद किरन वेदी ने कहा कि पुलिस ने जो किया वो सही था.. इतना ही नही किरन वेदी ने मजिस्ट्रेट की आलोचना तक की थी.. मतलब किरन वेदी पूरी तरह से पुलिस वालों के साथ खड़ी थी. जबकि यहाँ अब पुलिस वालों के साथ सिर्फ पुलिस वाले खड़े हैं ना कि उनके वरिष्ठ अधिकारी.. इसलिए दिल्ली पुलिस के जवान किरन वेदी को याद कर रहे थे.

इन सभी परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल ने बुधवार को अपने आवास पर बैठक बुलाई। उनके साथ इस बैठक में पुलिस कमिश्नर अमू्ल्य पटनायक, सीपी, ज्वाइंट सीपी व अन्य आला अधिकारी मौजूद थे.. आइये संक्षेप में समझते है कि आखित विवाद शुरू कैसे हुआ था..दरअसल उत्तरी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट परिसर में शनिवार(2 नवंबर) दोपहर बाद लॉकअप के बाहर कार पार्क करने पर वकीलों और पुलिस के बीच भारी बवाल हो गया. गुस्साए वकीलों ने पुलिसकर्मियों को घेरकर उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी. वकीलों की भीड़ बढ़ती देख पुलिसकर्मियों ने हवा में गोली चलाई, जो एक वकील को लग गई.. इसके बाद शुरू हो गया संग्राम.. वकीलों और पुलिस के बीच संग्राम.. जो अभी तक चलता हुआ दिखाई दे रहा है.