नक्सलियों के वेश में लोगों को लूट रहे थे पुलिसवाले, एक गलती ने पहुंचा दिया जेल

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भारत के कई राज्य ऐसे है जो नक्सलियों से प्रभावित हैं. नक्सली हथियारों के दम पर लोगों को डराते हैं, लूटपाट करते हैं. इतना ही नही जवानों और सुरक्षाकर्मियों पर हमला भी करते हैं. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से निपटने के लिए CRPF के जवानों को तैयार किया गया है. पुलिस की भी तैनाती बढ़ाई जाती है लेकिन तब क्या होगा,जब रक्षक ही भक्षक बन जाए!

दरअसल छत्तीसगढ़ से एक घटना सामने आई है जो आपको भी एक बार झकझोर कर रख देगी. नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में नक्सली बनकर पुलिस के जवान ही लोगों से लूटपाट कर रहे थे। पुलिस नक्सली वारदात मानकर इन वारदातों की जांच भी करती रही। मामला तब खुला जब लूटे गए मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने में पुलिस को कामयाबी मिली. अगर ये पुलिस वाले थोड़ी से गलती ना करते तो शायद कभी पकड़ में ना आते.

दरअसल छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से अलग अलग इलाकों में लूटपाट और आगजनी की कई घटनाएँ सामने आ रही थी. जिससे पुलिस परेशान थी. गत मंगलवार रात बेनूर थाने के पास कोकोड़ी गंगामुंडा में बस्तर ट्रैवल्स की एक यात्री बस को आग लगा दी गई. वारदात को अंजाम इस तरह दिया गया जैसा नक्सली करते रहे हैं. चार नकाबपोशों ने सड़क पर मोटरसाइकिल आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी. बस (सीजी-17 एफ-0930) सड़क पर रुक गई, तभी नकाबपोश हथियारबंद कथित नक्सलियों ने बस को कब्जे में ले लिया. लूटपाट करके बस में आग लगा दी.

अब पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की. तो कोई सुराग नही मिल रहा था, सबको लगा कि ये नक्सलियों द्वारा किया गया लूटपाट था, लेकिन जब पुलिस को लुटे गये एक मोबाइल फ़ोन की लोकेशन मिली तो पुलिस ने लोकेशन पर छापा मारा और आरोपी पुलिस वाले को गिरफ्तार कर लिया. सहायक आरक्षक पद पर भर्ती माधव कुलदीप (35) हिरदूराम कुमेटी (26) और डोलेंद्र बघेल (21) को भी गिरफ्तार किया गया. इनमें एक निलंबित है, एक डयूटी पर था और एक काफी दिनों से डयूटी से नदारद था.