सफल या असफल रहा चंद्रयान 2 मिशन ? अभी भी बचे हैं 8 पेलोड

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चंद्रयान-2 मिशन के विक्रम को सफलतापूर्वक लैंडिंग कराते वक्त संपर्क टूट गया था. इसके बाद से ही इसरो द्वारा विक्रम से सम्पर्क करने की कोशिश की जा रही है. वैज्ञानिक निराश हो गये, देशवासी निराश हो गये! इशारो चीफ भावुक हो गये थे. तो अब सवाल उठता है कि क्या इसरो का मिशन चंद्रयान 2 सफल रहा है या असफल!

दरअसल विक्रम की चाँद पर लैंडिंग से महज कुछ मिनट पहले ही संपर्क टूट गया था. लेकिन ISRO का यह मिशन नाकाम नहीं हुआ है, क्‍योंकि उम्‍मीदें अभी भी बाकी हैं। 978 करोड़ रुपए की लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सबकुछ खत्म नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानियों की हौसला अफजाई की. ऑर्बिटर में लगे 8 पैलोड चांद की सतह का नक्शा तैयार करेंगे. इसरो से मिली जानकारी के मुताबिक़, विक्रम से संपर्क भले ही टूट गया हो लेकिन ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है.

इसरो द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक़ ऑर्बिटर अभी भी घूम रहा है. इसरो ने यह भी कहा कि वह ऑर्बिटर से मिले डेटा पर रिसर्च कर रहा है. आर्बिटर में लगे 8 पैलोड चांद की सतह का नक्शा तैयार करेंगे और वहां खनिज तथा बर्फ का पता लगाएंगे. जिस ऑर्बिटर से लैंडर अलग हुआ था, वह चन्द्रमा की सतह से 119 किमी से 127 किमी की ऊंचाई पर घूम रहा है.

कहा जा रहा है कि जब तक विक्रम निष्क्रिय घोषित ना कर दिया जाए तब तक इससे सम्पर्क करने की कोशिश जारी रहेगी. वहीँ ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा,2,379 किलो वजनी ऑर्बिटर के साथ 8 पैलोड हैं और यह 1 साल काम करेगा यानी लैंडर और रोवर की स्थिति पता नहीं चलने पर भी मिशन जारी रहेगा. खैर प्रधानमंत्री मोदी ने देश और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि “हम होंगे कामयाब एक दिन”