ISRO पर इस तरह फ़िदा हुई दुनिया

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शुक्रवार देर रात भले ही चांद की सतह से लगभग 2 किमी पहले चंद्रयान के लैंडर विक्रम का पृथ्वी से संपर्क टूट गया हो लेकिन देश के वैज्ञानिकों के हौसले में कमी नहीं आई है. भारतीय वैज्ञानिकों के इसी हौसले और जज़्बे को लोग सलाम कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स पॉजिटिव ट्वीट करके इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ा रहे हैं तो विदेशों से भी इसरो की प्रशंसा में संदेशों की बाढ़ आ गई है.

देश के लोगों का कहना है, विक्रम से सम्पर्क टूटा तो क्या हुआ, सपनों से संपर्क अभी भी जुड़ा है. कोई भी शब्द हमारे देश की भावनाओं का वर्णन नहीं कर सकता है. हमें अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है. इसरो ने विज्ञान को अपनाने के लिए हजारों युवाओं को प्रेरित किया है और ये अपने आप में एक जीत है. कई युवा अब वैज्ञानिक बनने के सपने देख रहे है. देश ने इसरो के वैज्ञानिको की मेहनत को देखा है. उसे महसूस किया है. जहां पहले रात 2 या 3 बजे तक लोग क्रिकेट देखने के लिए जागते थे. वही दूसरी तरफ पूरा देश आधी रात को जाग कर विक्रम लैंडर के लैंड होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था. भारत में हर एक व्यक्ति ने chandrayaan2 के पलों को दिल की धड़कन की तरह महसूस किया है. ये इसरो के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि उसने देश के बच्चे बच्चे के मन में वैज्ञानिक बनने का सपना भर दिया है.

NASA ने भी इसरो के काम की सराहना करते हुए कहा है कि हम इसरो के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उनके चंद्रयान 2 मिशन को उतारने के प्रयास की सराहना करते हैं. आपने हमें अपनी यात्रा से प्रेरित किया है और भविष्य में सौरमंडल का पता लगाने के लिए दोनों साथ में काम करेंगे. भारत ही नही बाहरी देश भी इसरो के चंद्रयान 2 मिशन की सराहना कर रहे है. यूनाइटेड अरब अमीरात की स्पेस एजेंसी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम, जिसे चांद पर लैंड करना था, से संपर्क टूटने के बाद हम इसरो को अपने पूरे सहयोग का आश्वासन देते हैं. भारत ने खुद को स्पेस सेक्टर की अहम ताकत साबित किया है और इसके विकास और उपलब्धि में भागीदार है.’ वही ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने भी ट्वीट करके कहा कि लैंडर विक्रम, चंद्रमा पर अपने मिशन को साकार करने में कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर था. इसरो हम आपके प्रयासों और अंतरिक्ष में यात्रा जारी रखने की आपकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं.’

कई विदेशी अखबारों ने भी चंद्रयान 2 मिशन को लेकर खबर छापी है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि चंद्रयान 2 पहली कोशिश में चांद पर भले न उतर पाया हो, लेकिन इससे Technical skills and decades of space development का पता जरूर चलता है.’न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसका जिक्र भी किया कि चंद्रयान का ऑर्बिटर अब भी ऑपरेशन में है और चांद का चक्कर लगा रहा है.’ वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडलाइन ‘इंडियाज फर्स्ट एटेंप्ट टू लैंड ऑन द मून एपियर्स टू हैव फेल्ड’ में लिखा है कि ‘मून मिशन भारत के लिए सबसे बड़ा गर्व साबित हुआ है.’ उन्होंने लिखा कि ‘असफलता के बावजूद स्पेस एजेंसी और उसके वैज्ञानिकों के समर्थन में सोशल मीडिया पर वाहवाही का सैलाब देखा गया…यह घटना स्पेस मिशन के तौर पर भले ही झटका हो लेकिन इसमें भारत की युवा आबादी की महत्वाकांक्षा गहराई से देखी जा सकती है.’ उन्होंने लिखा कि कम लागत वाला यह स्पेस प्रोग्राम भारत के लिए अपने आप में एक बड़ी सफलता है. चंद्रयान-2 का खर्च 141 मिलियन डॉलर है जो कि अमेरिका के ऐतिहासिक अपोलो मून मिशन से कई गुना कम है.

अब अंतरिक्ष में भारत की ताकत का लोहा दुनिया ने जान लिया है और दुनिया भर की स्पेस एजेंसी ISRO के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करना चाहती है.