चंद्रयान 2 की तैयारियां हो गयी हैं पूरी, ISRO रचने जा रहा है एक और इतिहास

0
48

भारत के बड़े मिशन चंद्रयान 2 के लिए अब बहुत कम वक्त बचा है जब भारत का बड़ा बाहुबली आग उगलता हुआ अपने कंधे पर सेटेलाइट को लिए चन्द्रमा की तरफ बढेगा. 15 जुलाई की रात 2 बजकर 51 मिनट पर भारत का ये भारी भरकम राकेट रवाना किया जाएगा जिसे लोग बाहुबली का नाम दे रहे हैं. जब ये राकेट यानि कि बाहुबली आसमान का सीना चीरते हुए और आग उगलते हुए आसमान की तरफ बढेगा तो देश की निगाहें इस पर होंगी ही.. साथ ही पूरे विश्व के लोग इस पर नजरें बिछाएं रहेंगे. 15 जुलाई को भारत की धरती से निकलने वाला बाहुबली 6 सितंबर को चाँद पर पहुंचने की उम्मीद है. ये यान चंद्रमा के उस हिस्से पर लैंड करेगा, जिसे आज तक दुनिया के किसी भी देश ने एक्सप्लोर नहीं किया है. इस अभियान के तहत भारत के 13 वैज्ञानिक उपकरण चंद्रमा के बारे में अध्ययन करेंगे और ये नासा का एक लेजर उपकरण ले जाएगा. इसके लिए नासा से कोई पैसा नही लिया जाएगा.

इस चंद्रयान का नाम जियोसिंक्रोनस स्टैडिंग सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क 3 यानी GSLV Mk3 है. इसरो के वैज्ञानिक इसे बाहुबली कह रहे हैं. 15 जुलाई के लॉन्च के लिए ये लॉन्च पैड पर तैनात हो चुका है. बाहुबली का वजन करीब 640 टन है. इसकी ऊंचाई 15 मंजिला इमारत के बराबर है. हुबली रॉकेट करीब 3.8 टन वजनी सेटेलाइट को चांद पर ले जाएगा. भारत के सबसे भारी-भरकम लॉन्च पैड से ये तीसरा लॉन्च होगा.
यहाँ आपको यह भी जानना जरूरी है कि बाहुबली के पिछले तीन मॉडल की कामयाबी की पिछली तीन कहानियां ये बताने के लिए काफी हैं कि इस बार भारत आसमान में सबसे मजबूत छलांग लगाने वाला है. इस पूरे प्रोजेक्ट में इसरो को 11 साल लग गए हैं. चंद्रयान 2 भारत का दूसरा मून मिशन है. भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा. जो वहां के विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा. इसके साथ ही आपको यह भी जानना जरूरी है कि यह चंद्रयान पूरी तरह स्वदेशी है. इस मिशन को पूरा करने के बाद चन्द्र की सतह पर भारत चौथा देश बन जाएगा. इसके पहले अमेरिका, रुस और चीन अपने यान को चांद की सतह पर भेज चुके हैं.
बाहुबली के खासियत को आप इन बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं


-ये अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है. जिसे पूरी तरह से देश में बनाया गया है.
-ये 4 टन वजनी सेटेलाइट को ले आसमान में ले जाने में सक्षम है. लो अर्थ ऑर्बिट में ये 10 टन वजनी सेटेलाइट ले जा सकता है.
-ये अब तक का सबसे भारीभरकम लॉन्चर है. इसका वजन 640 टन है.
-ये चंद्रायन मिशन-2 के सेटेलाइट को उसके ऑर्बिट में स्थापित करेगा.
-ये अब तक का सबसे ऊंचाई वाला लॉन्चर है. इसकी ऊंचाई 15 स्टोरी बिल्डिंग के बराबर है.
-इसमें S200 रॉकेट बूस्टर लगे हैं जो रॉकेट को इतनी शक्ति देगा कि वो आसमान में छलांग लगा सके. S200 को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में बनाया गया है.
-इसमें सबसे शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन C25 लगा है जिसे CE-20 पावर देगा.
-GSLV Mk 3 के अलग-अलग मॉडल का अब तक तीन बार सफल प्रक्षेपण हो चुका है.

अब आपको यहाँ यह भी जानना जरूरी है कि इस चंद्रयान में क्या चुनौतिया आने वाली हैं.
ये हैं चुनौतियां
-हमारी धरती से चांद करीब 3,844 लाख किमी दूर है इसलिए किसी भी यहां से मेसेज के वहां पहुंचने में कुछ मिनट लगेंगे।

  • सोलर रेडिएशन का भी असर चंद्रयान-2 पर पड़ सकता है।
  • वहां सिग्नल कमजोर हो सकते हैं। बैकग्राउंड का शोर भी कम्युनिकेशन पर असर डालेगा।
  • भारत ने अपना पहला चन्द्रयान साल 2008 में भेजा था. उस वक्त इस प्रोजेक्ट में 450 करोड़ रूपये लगे. अब चंद्रयान 2 की तैयारी पूरी हो चुकी है. बहुत जल्द ही भारत चंद्रयान पर पहुंचकर चाँद की धरती फतह कर लेगा.