श्रीलंका से पहले और भी बहुत से देशों में बैन है बुर्का

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पर्दा प्रथा का एक इस्लामी हिस्सा है बुर्का, जिसे मुस्लिम महिलायें पहनती हैं. ये एक ख़ास तरह का लिबास है जो उनके चेहरे को ढँकने का काम करता है.  मुस्लिम इसे अपनी संस्कृति से जुड़ा हुआ मानते हैं. अलग-अलग देशों में इसे पहनने के अलग- अलग तरीके हैं. हिजाब, खिमार, जिलाब, चादोर, अमाया और निकाब बुर्के के ही कुछ रूप हैं.

बहुत से इस्लामिक देशों में महिलाओं के लिए इसे पहनना अनिवार्य है, और सख्ती से अनिवार्य है. ये वो देश हैं जो इस्लामिक रीति-रिवाजों को सख्ती से मानते हैं. इन देशों में अगर कोई महिला बुर्का नहीं पहनती है तो इस जुर्म में मानकर उसे सख्त सजा दी जाते है.

लेकिन एक तरफ जहां बहुत से इस्लामिक देशों ने बुर्के को कट्टरता से अनिवार्य कर रखा है वहीं बहुत से गैर-इस्लामिक देशों ने इसपर सख्त पाबंदी भी लगा रखी है. 28 अप्रैल को श्रीलंका भी उन्ही देशों की सूची में शामिल हो गया जिन्होंने बुर्के पर पाबंदी लगा रखी है.

अभी हाल ही में कोलम्बो में हुए बम धमाकों के चलते श्रीलंका सरकार की तरफ से ये कदम उठाया गया और बुर्के पर प्रतिबन्ध लगा दिया. मैत्रीपाला सिरिसेना ने सार्वजनिक जगहों पर उन लिबासों को पहनना प्रतिबंधित कर दिया है जिनके चलते इंसान अपना चेहरा ढँक सकता है और अपनी पहचान छुपा सकता है. 

ऐसा करने के बाद श्रीलंका भी अब बुर्के को बैन करने वाले उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिसमें ऑस्ट्रिया, चीन, डेनमार्क, कनाडा, बेल्जियम, फ्रांस , ताजकिस्तान, तंज़ानिया, कैमरून, बुल्गारिया, गैबन, कांगो, चाड, नीदरलैंड, मोरक्को और इजिप्ट पहले से शामिल हैं.

श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबन्ध की घोषणा के बाद बहुत से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन श्रीलंका की सरकार की खिलाफत पर उतर आए हैं. वो श्रीलंका सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना कर रहे हैं और इसे ठीक नहीं बता रहे हैं.

श्रीलंका मुस्लिमों में सरकार के इस फैसले को लेकर गुस्सा है. उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर एक धर्म को निशाना बना रही है. इसके अलावा श्रीलंका के इस्लामिक विद्वानों ने कहा कि वो अभी इसका समर्थन कर रहे हैं लेकिन अगर ऐसा कोई कानूनी आदेश आया तो वो उसका विरोध करेंगे.

पूरे विश्व और खासकर एशिया में मशहूर देवबंद भी श्रीलंका के इस फैसले से ख़ासा नाराज़ है. देवबंद  के उलेमाओं की तरफ से भी यही सुनने को आया कि श्रीलंका की हुकूमत महज़ एक फिरके पर निशाना साध रही है.

लेकिन अगर कुछ कट्टर इस्लामिक देशों को छोड़ दिया जाए तो ये देखने को मिलता है कि पिछले कुछ वक्त में वैश्विक स्तर पर बहुत से देश बुरखे पर बैन लगा रहे हैं. बहुत से देशों ने इन चेहरा ढंकने वाले लिबासों को कानूनन बैन कर दिया है.

बुरखे को बैन करने वाले इन देशों में सिर्फ गैर-इस्लामिक देश ही नहीं हैं बल्कि मुस्लिम मुल्क इजिप्ट भी शामिल है. इजिप्ट की सरकार ने ये कदम इस्लाम के कट्टरपंथी संगठनों को सबक सिखाने के लिए उठाया. उसने इन संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए बुर्के को बैन कर दिया.

जिन देशों में अभी तक बुर्के को बैन किया गया है वो बुर्के को आतंकवादियों का मददगार मानते हैं. बहुत सी आतंकी घटनाओं में ऐसा देखने को मिला है कि इन घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकवादी बुर्का पहन कर ही आए.

कुछ दक्षिणपंथी संगठन अक्सर बुर्के पर बैन लगाने का विरोध करते हैं. पहले यही सारे संगठन जो बुर्का पहनने को अपने धर्म से जोड़कर देखते थे, वो अब इसको चलन में रखने के नये तर्क देते हैं. वो कहते हैं कि बुर्के पर बैन लग जाने से औरतों पर और भी ज्यादा पाबंदियां लग जाती हैं.

वो कहते हैं कि बुर्के पर प्रतिबन्ध लगने के बाद वो परिवार जो महिलाओं के बुर्का पहनने का समर्थन करते हैं, वो अपने घरों की महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने देंगे. और महिलाओं का घर में कैद होकर रह जाना महिलाओं के हित में तो बिलकुल ही नहीं है.

बहुत से लोग जो इस्लाम को मानते हैं, वो अक्सर कहते हैं कि बुर्का उनके धर्म से जुड़ा हुआ है और उनके धर्म के साथ आया है, लेकिन उनकी ये बात गलत है. बुर्का इस्लाम से बहुत पुराना है. ये बेंज़ाटाइन साम्राज्य के वक़्त से चला आ रहा है.

अरब देशों में धूल और धूप से बचने के लिए महिलायें बुर्के का प्रयोग किया करती थीं. बहुत से देशों में  मर्दों की नज़रों से बचने के लिए भी इसका इसका इस्तेमाल करती थीं. इस हिसाब से जिन देशों में धूल नहीं है, इंसान पढ़े-लिखे हैं, कानूनों को मानने वाले हैं और औरतों की इज्ज़त करने वाले हैं वहाँ बुर्के की उपयोगिता कितनी रह जाती है?

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