कश्मीर में तैनात हो सकता है CRPF का विदेशी सिपाही, नक्सलियो को कर चुका है परेशान

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कश्मीर में हुए आतंकी हमला आज पूरे देश की आँखे नम कर दी हैं. सुरक्षा जवानों पर आईई डी से हमला किया है जिसमे 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गये हैं लेकिन इस बात की चर्चा बहुत तेजी से हो रही है कि सीआरपीएफ जल्द ही अपने विदेशी सिपाही को कश्मीर में तैनात कर सकती है.
सीआरपीएफ का ये विदेशी सिपाही आरडीएक्स और आईइडी का एक्सपर्ट माना जाता है. छत्तीसगढ़ का सुकमा, बीजापुर हो या महाराष्ट्र का गढ़चिरौली, सभी जगह नक्सली हमलों को नाकाम करने में इस सिपाही ने बड़ा रोल निभाया है. जिससे नक्सली परेशान हो गये हैं. इसी तरह कश्मीर में सीआरपीएफ पर होने वाले हमलों को नाकाम करने के लिए अब इस सिपाही की तैनाती कश्मीर में भी हो सकती है. इसका नाम है वाकोस… वाकोस मूल रूप से बेल्जियम का है. बेंगलुरू ट्रेनिंग सेंटर में उसे ट्रेंड किया जाता है, जहां उससे आईईडी और आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों की पहचान कराई जाती है..
सीआरपीएफ के पीआरओ गिरीश चन्द्र दास ने बताया, “वाकोस अब तक 200 से अधिक बड़े हमलों को नाकाम कर चुका है. सिपाही वाकोस मूल रूप से बेल्जियम का है इसी के चलते इसे बेल्जियन शेपर्ड भी कहा जाता है. लेकिन सीआरपीएफ में इसे वाकोस के अलावा वाला, वालीसा, क्रेस्ट ड्रोन आदि नाम से भी बुलाया जाता है.


आपको बता दें कि 358 बेल्जियन शेपर्ड देशभर में सीआरपीएफ के साथ काम कर रहे हैं. वहीं 253 डॉग ब्रीडिंग एवं ट्रेनिंग सेंटर, तरालू, बेंगलुरु में ट्रेनिंग ले रहे हैं. यहां इन्हें 10 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है…ट्रेनिंग के बाद इन्हें सीआरपीएफ अपनी टीम में शामिल करती है इसके बाद ये आरडीएक्स और आईईडी का पता लगाते हैं और दुशमनों पर हमला भी करते हैं… बेल्जियन शेपर्ड की काबिलियत को देखते हुए एसएसबी और कर्नाटक पुलिस भी इन्हें अपनी टीम में शामिल कर रही है. इस दौड़ में राजस्थान पुलिस भी शामिल है. पीआरओ दास ने बताया कि एसएसबी के 5 और कर्नाटक पुलिस के पप्स तरालू में ट्रेनिंग ले रहे हैं.
अब आपको यह भी जानना चाहिए कि आखिर वाकोस इतना भरोसेमंद क्यों है? और सीआरपीएफ इनका इस्तेमाल क्यों कर रही है.


ये अमेरिकी सेना में भी शामिल हैं.
लादेन को मारने वाली टीम में भी ये शामिल था.
एक बार में 25 से 30 किलोमीटर तक चल सकता है.
इस पोजिशन में भी वाकोस 270 डिग्री पर बिना गर्दन घुमाए देख सकता है. फोटो क्रेडिट सीआरपीएफ.
जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, स्नाइपर डॉग लगातार 10 से 12 किमी तक चलते हैं.
दूसरे टोही डॉग के मुकाबले इनकी सूंघने की क्षमता ज्यादा होती है.
एक डॉग की कीमत 75 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है.
देश में पहली बार सीआरपीएफ और आईटीबीपी ने 2011 में खरीदा था.
2014 में एनएसजी ने भी इसे अपनी टीम में शामिल किया.
हवा और पानी दोनों में काम कर सकता है.
भौंकने के बजाय सिर से देता है विस्फोटकों के बारे में इशारा.
इसकी आंखें बिना सिर हिलाए 270 डिग्री तक देख सकती हैं.
इसका सिर बड़ा और नाक चौड़ी होती है.
व्हाइट हाउस की सुरक्षा में भी तैनात है.
व्हाइट हाउस में घुसे संदिग्ध को पकड़वाया था.


वाकई वाकोस की काबिलियत को देखकर तो यही लगता है कि कश्मीर में सीआरपीएफ की टीम में शामिल होने के बाद जवानों को मदद जरुर मिलेगी और आरडीएक्स या आईईडी जैसी विस्फोटक पदार्थों की खोजबीन करने में मदद मिलेगी और जवानों को ऐसे ब्लास्ट से निपटने में मदद मिलेगी.

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