तो ये है अमेज़न के जंगलों में आग लगने की वजह

बिना ऑक्सीजन के धरती पर जीवन संभव नहीं है, जितना भी ऑक्सीजन धरती पर मौजूद है उसका तकरीबन 20 फीसदी ऑक्सीजन अमेजन के जंगल हमे देते हैं, दक्षिण अमेरिका में मौजूद ये दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन है इसे lungs of earth के नाम से जाना जाता है।

बचपन में पढ़ाया जाता था कि अमेज़न जंगल अपने आप में ही एक अलग संसार है, वहां मौजूद जीवन बेहद ही अनोखा है। यहां पाए जाने वाले जानवर और पेड़ शायद ही दुनिया के किसी और कोने में मिलें, इसके साथ ही ये कई जनजातियों का घर भी है। इसे स्पेस में से भी साफ़ देखा जा सकता है.

लेकिन बीते दिनों आई ख़बरों से लगता की आने वाले समय में शायद ये जंगल ढूंढने पर भी न मिले, दरसअल पिछले कई सालों से अमेज़ॉन के इन जंगलों में आग लगती ही रहती है,पर ये बात कभी mainstream मीडिया कवर नहीं करती थी, सभी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी, लेकिन कुछ ही दिनों पहले वहां लगी भयानक आग ने सोशल मीडिया का attention अपनी ओर खींचा, ये जंगल 2 हफ्तों तक जलता रहा, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने वहां की तस्वीरों को शेयर किया तब जा कर बाकी दुनिया हरकत में आई। सैकड़ों पेड़ जल कर राख हो गये हज़ारों जानवर बेमौत मारे गए।

बीते कुछ सालों से यहां पर आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं. लेकिन, हाल ही में जो आग लगी है उससे तबाही का जो मंजर था उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते, ये आग इतनी भयावह थी कि अमेजन, रोडांनिया और साओ पाओलो जैसे शहरों में धुएं की वजह से अंधेरा छा गया. इन जगहों पर लगी आग से ब्राजील का 2700 किमी क्षेत्र काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. जंगल मे मौजूद लाखों जानवर बेमौत ही मारे गए।

इसी साल यहां पर आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं. लेकिन ये खास तौर से सिर्फ अमेज़ॉन के जंगलों के साथ ही नहीं हो रहा बल्कि दुनिया भर मे मौजूद ऐसे कई जंगल है जिनका आस्तित्व अब खतरे में पड़ गया है और उसी के साथ साथ इस धरातल पर मोजूद जीवन भी कुछ इसी तरह के संकट से जूझ रहा है.

जो हुआ उसे सुधारा तो नही जा सकता लेकिन एक सवाल यहां जरूर उठाया जा सकता है कि, इन वर्षावनों में आग लगने के इतनी घटनाएँ क्यों होती हैं, ये आग या तो प्राकृतिक कारणों से लगती है या फिर इंसान की करतूतों से, अब ये आग इन दोनों में से किस वजह से लगी ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन, इस जंगल को जला कर खत्म करने की कोशिश ज्यादातर इंसानों ने ही की है. UK के अख़बार the guardian की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार ब्राज़ील में 72,000 से ज्यादा बार अलग-अलग जगहों पर आग लगी. इनमे से ज़्यादातर आग आस पास के लोगों ही लगाई थी।

यहां एक और सवाल उठता है कि लोग ऐसा क्यों करते हैं, ये जंगल ब्राजील, venezuela, कोलंबिया,अर्जेंटीना,बोलीविया जैसे देशों तक फैला हुआ है. लेकिन इन जंगलों का लगभग 60% हिस्सा ब्राज़ील में है.

दरअसल ब्राज़ील में 1965 में बना एक नियम किसान को एमेजॉन वर्षावन में ज़मीन खरीदने तो देता था, लेकिन उन्हें उसका उसका सिर्फ 20 फीसद हिस्सा खेती के लिए मिलता था।

लेकिन बाद कि सरकारों ने धीरे धीरे वहाँ के लोगों को ढील देनी शुरू कर दी, वहाँ के मूलनिवासी लोगों को जंगल काटने के अधिकार दे दिए. गैरकानूनी कटाई पर जो सजाएं थीं, वो घटा दी गईं.

मतलब कुल मिला कर कुछ ऐसे इंतज़ाम कर दिए गए कि लोग जंगलों को अपनी जरूरत अनुसार काट सकें. कई NGO’s ने इसपर विरोध जताया तो मामला ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा लेकिन कोर्ट ने इसपर कुछ खास प्रतिक्रिया नही दी।

अफसोस की बात है कि आज दुनिया भर में तमाम जगहों पर ऐसे ही जंगलों को ख़त्म किया जा रहा है। आज हम इससे आने वाले सारे खतरों को जान कर भी अनजान बने हुए है, अपने स्वार्थ के लिए हम इन जंगलों को काटते जा रहे है, लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा तो निश्चित तौर पर हमारी आने वाली पीढ़ियों का खुली हवा में सासं लेना भी दूभर हो जाएगा.