फैक्ट चेक करने वाली वेबसाईट ऑल्ट न्यूज के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने ही फैलाई फेक न्यूज

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फैक्ट चेक, किसी खबर या न्यूज के बारे में ये पता करना कि वो खबर सच्ची है या झूठी, फैक्ट चेक कहलाती है और फैक्ट चेक करने वाले को कहते हैं फैक्ट चेकर. लेकिन क्या हो अगर फैक्ट चेक करने वाला ही फर्जी खबर फैलाने लगे? ऐसा हुआ है और ये किया है ब्रह्मांड के स्वघोषित सर्वश्रेष्ठ फैक्ट चेकर वेबसाईट ऑल्ट न्यूज के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने.

प्रतीक सिन्हा ने अपने ट्वीटर अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की, इस तस्वीर में पीएम मोदी विश्वप्रसिद्द साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय की प्रसिद्द किताब वॉर एंड पीस के पन्ने पलट रहे थे. इस तस्वीर को यूँ ही शेयर नहीं किया गया बल्कि इसके पीछे एक वजह थी. वजह ये थी कि एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी वर्णन गोंसाल्विस से पूछा कि उनके घर में विवादस्पद किताब वॉर एंड पीस इन जंगलमहल : पीपल, स्टेट एंड माओइस्ट और कुछ सीडी जैसी ‘‘आपत्तिजनक सामग्री” क्यों रखी थी? न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की पीठ ने गोन्जाल्विस और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा ऐसी किताबें और सीडी पहली नजर में संकेत देते हैं कि वे राज्य के खिलाफ कुछ सामग्री रखते थे.

ये न्यूज बाहर आई और एजेंडावादी लिबरल गैंग ने इसे हाथों हाथ लिया. सोशल मीडिया पर वॉर एंड पीस ट्रेंड करने लगा. दरअसल एजेंडावादियों ने अपना एजेंडा चलाने के लिए “वार एंड पीस इन जंगलमहल : पीपल, स्टेट एंड माओइस्ट” में से अपने काम की चीज “वॉर एंड पीस” को लपक लिया और “इन जंगलमहल : पीपल, स्टेट एंड माओइस्ट” को कूड़ेदान में फेंक दिया क्योंकि इसके होते एजेंडा चलना मुश्किल था. चूँकि देश में रहकर देशविरोधी कार्य करने वालों अर्बन नक्सल कहते हैं. तो स्वघोषित फैक्ट चेकर प्रतीक सिन्हा ने पीएम मोदी की एक तस्वीर अपलोड कर दी जिसमे पीएम मोदी वॉर एंड पीस पढ़ रहे हैं और तस्वीर के साथ अर्बन नक्सल लिखा. ये दिखाने के लिए कि पीएम मोदी भी वॉर एंड पीस पढ़ रहे हैं तो वो भी अर्बन नक्सल हैं. प्रतीक ने कोर्ट के वॉर एंड पीस पर आपत्ति जताने के ऊपर तंज किया था.

लेकिन जल्द ही सच सामने आया कि कोर्ट ने जिस “वॉर एंड पीस” की बात कही है वो लियो टॉलस्टॉय की विश्वप्रसिद्द किताब नहीं बल्कि कोलकाता के एक लेखक बिस्वजीत रॉय की किताब है जिसमे नक्सल मूवमेंट के बारे में लिखा है. जंगलमहल इलाका पश्चिम बंगाल में स्थित है. नक्सलवाद की शुरुआत भी पश्चिम बंगाल के ही नक्सलबाड़ी से हुई थी, जिसने बाद में पूरे बंगाल को चपेट में ले लिया. जंगलमहल भी नक्सल से बुरी तरह प्रभावित था. हमने ये किताब नहीं पढ़ी इसलिए हमें नहीं मालूम कि इस किताब में क्या लिखा है लेकिन अगर कोर्ट और जांच एजेंसियां इस किताब पर आपत्ति जाता रही है तो अंदाजा लगा सकते हैं कि ये किताब नक्सल साहित्य की कैटेगरी में आती होगी.

अब आते हैं ब्रह्मांड के सबसे बड़े फैक्ट चेकर प्रतीक सिन्हा पर. दुनिया भर की खबरों का फैक्ट चेक करने वाला खुद ही जब भ्रामक जानकारी देने लगे तो उसके लिए एक कहावत है “चिराग तले अँधेरा”. मतलब कि दावा करो कि हम हैं ब्रह्मांड के सबसे बड़े फैक्ट चेकर, दुनिया भर की फर्जी ख़बरों का खुलासा करते हैं और खुद ही फर्जी खबर फैलाते हैं. सिर्फ प्रतीक सिन्हा ही नहीं बल्कि कई मीडिया संस्थानों ने भी ये खबर चला दी कि कोर्ट ने लियो टॉलस्टॉय वाले वॉर एंड पीस पर आपत्ति जताई है. जो उपाधि ले कर प्रतीक सिन्हा घुमते हैं, कायदे से उन्हें इन ख़बरों का फैक्ट चेक करना चाहिए था लेकिन खुद ही फेक न्यूज फैलाने लगे. बात ये है कि जब एजेंडा चलाना हो तो कौन जहमत उठाये फैक्ट चेक करने की. फर्जी खबर ही फैला दो. एजेंडा चलना चाहिए .