महात्मा गाँधी की मौत के बाद…

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आज ही के दिन साल 1948 में महात्मा गाँधी की हत्या कर दी गई थी.. 70 साल पहले आज ही के दिन नए नए आज़ाद हुए भारत की 30 करोड़ आबादी अपने महात्मा के लिए सड़कों पर निकल आये थे. उनकी मौत के कुछ पल बाद ही उनके हत्यारे नाथूराम राम गोडसे को पकड़ लिया गया और उसे फांसी की सजा दे दी गई.. इस खबर को न्यू यॉर्क टाइम्स ने कुछ इस तरह दिखाया  

“Gandhi Is Killed By A Hindu; India Shaken, World Mourns; 15 Die In Rioting In Bombay, Three Shots Fired”.

यानि कि गांधी को एक हिन्दू ने मारा, भारत सदमे में.. विश्व शोक में., मुंबई में दंगे में 15 की मौत, तीन गोलियां चलाई गई.

इस खबर में बार बार एक ही बात बोली गई कि बापू कि हत्या एक हिन्दू ने की.

इस खबर के कुछ ही पल बाद मुंबई में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए जिसमे लगभग 15 लोगों की मौत और 50 लोग घायल हुए. रुंधे हुए गले से तत्कालीन प्रधानमंत्री ने रेडियो के जरिये लोगों से अहिंसा के पुजारी बापू की मौत पर लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की.

गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के तमाम बयानों के मुताबिक गांधी जी को मारने के पीछे उनकी जो वजह थी वो यह हैं

  • “मैं जानता हूँ कि गांधी जी की हत्या करके मैं तमाम भारतवासियों की भावनाओं को आहत करूँगा पर मेरा मानना है कि उनके अभाव में भारत की राजनीति बेहतर और प्रैक्टिकल होगी और बेहतर सशस्त्र बलों के साथ जवाबी कार्यवाही करने में सक्षम होगी”
  • गाँधी जी सत्य का ढोंग करते थे
  • गोडसे ने कहा कि गांधी ने एकतरफा प्रथाओं के साथ सभी हिंदुओं की भावनाओं का शोषण किया।
  • गोडसे ने कहा कि वो गांधीवादी अहिंसा शिक्षाओं का विरोध नहीं करते, लेकिन गांधी की धार्मिक सहिष्णुता और अहिंसा की बात ने पहले ही भारत और पाकिस्तान का विभाजन कर दिया जिस वजह से लाखों लोगों के घर उजड़ गए, और दोनों देशों में भारी हिंसक नुकसान हुआ।

यह था नाथूराम गोडसे का आखिरी बयान

वैचारिक मतभेदों के चलते नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या की जो यकीनन गलत था और इस वजह से उन्हें 8 नवम्बर 1949 को फांसी दे दी गई.

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