पिछले 5 सालों में कितना स्वच्छ हुआ भारत

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भारत सरकार ने अबतक 96.25 फ़ीसदी घरों में शौचालय बनाया जबकि अक्टूबर 2014 के पहले केवल 38.7 फ़ीसदी घरों में ही शौचालय थे.

महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी. उनका सपना था कि देश के लोग स्वच्छ भारत के लिए काम करे और हमारे देश को पावन बनाए.

महात्मा गाँधी के सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी 105वीं जयंती पर स्वच्छ  भारत अभियान की शुरुआत की थी और उन्होंने लोगों से ये अपील की, की लोग अधिक से अधिक मात्रा में इस अभियान से जुडें.

मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद समाज को आगे बढ़ाने के लिए बहुत सारी नई योजनाओं को हरी झंडी दिखाई. सभी योजनाओं पर जोर- शोर से काम हुआ और सभी योजनायें सफल भी रहीं. ऐसी ही कुछ सफल योजनाओं में से एक है स्वच्छ भारत अभियान. इस अभियान को शुरू करने पीछे प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़ा लक्ष्य था देश को साफ़ बनाना और हर घर तक शौचालय पहुंचाना.

2014  में जब इस अभियान की शुरुआत हुई थी तब बहुत से क्षेत्रों में आधे से भी कम घरों में शौचालय थे. आंकड़े बताते हैं कि करीब 61.3% लोग आजादी के करीब 70 सालों बाद भी खुले में शौच करने के लिए मजबूर थें. लेकिन प्रधानमन्त्री मोदी के इस मिशन के कारण आज भारत में 98.90% घरों में शौचालय है.

अभियान की शुरुआत में 1 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य था, और आंकड़े बताते है कि आज तक 9,23,60,924 घरों में शौचालय निर्माण हुआ है.

शौचालय बनवाने के पीछे महिला सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान की रक्षा, बीमारियों से बचाव और पर्यावरण का संरक्षण यह कुछ अहम कारण है .

भारत सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़ों की मानें तो अबतक 96.25 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है. जबकि अक्टूबर 2014 के पहले केवल 38.7 फ़ीसदी घरों में ही शौचालय थे.

इन आंकड़ों से साफ़ है कि भाजपा के शासन में कांग्रेस के शासनकाल के मुक़ाबले दोगुनी तेजी से शौचालय बने हैं.

भारत सरकार ने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को दो भागों में बांटा है. जिसका पहला भाग है स्वच्छ भारत ग्रमीण. और इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर में शौचालय बनाने और गावों को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

इसका दूसरा भाग है स्वच्छ भारत शहरी. शहरों में अधिकतर घरों में पहले से ही शौचालय बने होते हैं. लेकिन घरों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी शौचालय हो, ये सुनिश्चित करना इस मिशन का मक़सद है. साथ ही कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर भी मिशन में ज़्यादा फ़ोकस है.

भारत में खुले में शौच दशकों से चली आ रही समस्या है, जिसकी वजह से कई बीमारियां भी फैलती हैं.

स्वच्छ भारत अभियान को न सिर्फ लागू किया गया बल्कि इसके तहत लोगों को जागरूक करने के लिए कई मुहिम भी चलाई गईं. लोगों को अलग- अलग तरीकों से जागरूक करने की कोशिश की गई. डिजिटल प्लेटफोर्म से लेकर हर जगह इसका खूब प्रचार- प्रसार किया गया .

कहते है फिल्में समाज का आईना होती है .“टॉयलेट एक प्रेम कथा” फिल्म को आप भूले तो नहीं होंगे. इस फिल्म ने भी शौचालय के जरूरत और अहमियत को लोगों तक पहुचने में बड़ा योगदान निभाया था. तभी तो इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया था.

“हर सपना सच करेगा इंडिया, बनेगा स्वच्छ इंडिया” यह टैग लाइन याद ही होगी आप सबको. जिसमे बॉलीवुड के कितने दिग्गज कलाकालों ने भाग लिया था. अलिया भट्ट और वरुण धवन जैसे सेलिब्रिटीज ने आकर्षक विज्ञापन से लोगों का ध्यान आकर्षित किया था. वहीं अन्य बॉलीवुड सेलिब्रिटीज जैसे सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर और अनिल कपूर जैसे कई और कलाकारों ने भी सड़कों पर झाड़ू लगाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया.

कल्पना करना या सपना देखना सबको आता है. लेकिन उस सपने को पूरा करना सबके बस की बात नही होती. साफ़ सफाई सबके लिए बहुत जरूरी है. लेकिन कुछ लोगों के लापरवाह रवैये के कारण पूरे देश को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. यह हम या फिर मोदी सरकार नहीं कह रहे की इस सरकार ने ज्यादा काम किया है . आकड़ों से यह साफ़ साफ़ ज़ाहिर हो गया है कि हमारे देश में पिछले 5 वर्षों में कितनी सफाई हुई है क्योंकि  साफ़ सफाई सब के लिए ज़रूरी है  और एक स्वस्थ देश के निर्माण के लिए भी .